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short moral story in hindi"टोपीवाला" for class 2

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  गर्मी के दिनों की बात है।एक गांव में एक टोपीवाला रहता था।वह रोज़ शहर में अपनी टोपियाँ बेचने जाता था।एक दिन जब वह शहर से टोपी बेचकर लौट रहा था तब उसने एक छायादार पेड़ देखा।वह पेड़ के नीचे अपनी टोपियों वाली गठरी रख खाने बैठ गया।खाना खाकर उसे नींद आने लगी।टोपीवाले ने सोचा,"कुछ देर आराम कर लेता हूँ"।ऐसा सोच कर वह सो गया।     कुछ देर बाद वहाँ एक बन्दरों का झुंड आया।बंदरों ने गठरी खोलकर टोपीवाले की टोपियाँ निकाल कर पहन ली।कुछ देर बाद जब टोपीवाला जागा तो उसने देखा उसकी गठरी तो खाली हैं।उसने इधर उधर नज़र घुमा कर देखा लेकिन उसे टोपियाँ कहीं नज़र नहीं आई।फिर कुछ देर बाद उसकी नज़र पेड़ पर पड़ी तब उसे समझ में आया की उसकी टोपियाँ तो बंदरों ने पहन रखी हैं।उसने बहुत कोशिश की लेकिन बंदरों ने टोपियाँ वापस नहीं की।गुस्से में आकर उसने अपनी टोपी भी फ़ेक दी।जैसे ही उसने अपनी टोपी नीचे फेकी बंदरों ने भी अपनी टोपियाँ फेक दी।टोपीवाला ख़ुशी- खुशी सारी टोपियाँ लेकर अपने गांव लौट गया। शिक्षा:कोशिश करनेवालों की कभी हार नहीं होती।

motivationalstory for all,"जल्दबाज़ी" hindi moral story for school students with good learning

   एक शहर में राजू नाम का आदमी था।उसे हर बात की जल्दी रहती थी।जैसे की  नौकरी जाने की जल्दी और वहाँ से वापस लौटने की जल्दी, खाने की जल्दी, खाने के बाद सोने की जल्दी, दुनिया का कोई काम नहीं था जिसमें उसे जल्दी नहीं होती थी।कई बार तो उसकी इस आदत के कारण उसका काफी काम भी खराब हो जाता था।लेकिन राजू था की सुधरने का नाम ही नहीं लेता था।     एक बार राजू अपनी मौसी के घर पालनपुर गया। जनवरी का महीना था ।इसलिए मौसी ने चावल के पापड़ बनाये हुए थे।मौसी ने राजू को चाय के साथ चावल के पापड़ सेक कर खाने को दे दिए। चावल के पापड़ खाने में थोड़े कड़क होते हैं।लेकिन राजू फटा फट चावल के पापड़ खाने लगा।मौसी ने राजू को टोकते हुआ ज़रा आराम से खाने की सलाह दी।     लेकिन राजू कहा सुनने वाला था ।वह तो बस फटाफट खाये जा रहा था। अचानक एक पापड़ का टुकड़ा राजू के गले में फस गया।राजू को अब घबराहट होने लगी। मौसी समझदार थी।वह पड़ोसी की मदद से राजू को समय रहते अस्पताल ले गई।डॉक्टर ने राजू का ऑपरेशन कर पापड़ का टुकड़ा  निकाल दिया।अब राजू समझ गया था के हर बात में जल्दी ठीक नहीं हैं।  शिक्षा:हमे...

moral story with nitti ," कंजूस धनीराम" for school children

       पुराने समय की बात हैं। पालनपुर नाम का एक छोटा गाँव था।उस गाँव में धनीराम नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था।धनीराम के पास बहुत धन था। धनी ने अपना सारा धन अपने घर में अनाज भरने की कोठी में छिपा कर रखा था।वह हर रोज़ आंंधी रात को उठता और अपने सारे सोने के सिक्के गिनता और फिर तसल्ली से सो जाता।लेकिन वह स्वभाव से बहुत कंजूस था।अगर कभी लोग उसके पास मदद मांगने आते तो मना कर देता।        उसके पड़ोस में एक रामू नाम का गरीब धोबी रहता था। रामू का बेटा पढ़ाई में बहुत होशियार था।रामू उसे पढ़ाई के लिए शहर भेजना चाहता था। रामू ने धनीराम से पैसे कि मदद मांगी तो उसने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।     एक दिन एक चोर ने धनीराम को पैसे गिनते देख लिया।अब चोर मौके की तलाश में था।कुछ दिन बाद धनीराम के बेटे की तबियत खराब हो गई।गाँव के वैद्य ने उसे शहर जाने की सलाह दी। धनीराम जैसे ही शहर गया ही रात को चोर ने सोने के सिक्के निकाल कर उनकी जगह पत्थर रख दिए ।    जब धनीराम शहर से लौटा तो सिक्कों की जगह पत्थर देखकर वह बहुत रोया।अब धनी को एहसास हो गया था की ...

"लोमडी और अँगूर की कहानी" fox and grapes story in hindi

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 गर्मी के दिनों की बात हैं।नागपुर शहर के पास एक जंगल था।जंगल में बहुत से जानवर रहते थे।एक दिन एक लोमडी खाना तलाश करते करते जंगल से बाहर निकल गई।       जंगल के बाहर उसने एक बगीचा देखा। वह उस बगीचें में घुस गई।वहाँ लोमडी ने  बहुत से बड़े और घने पेड़ देखें।उन में से एक पेड़ पर लोमडी ने एक अँगूर का गुच्छा लटका देखा। अंगूरों को देखकर लोमडी मन ही मन सोचने लगी ,"चलो आज तो में इन अंगूरों से अपनी भूख और प्यास दोनों ही बुझा लूंगी "।ऐसा सोच कर लोमडी ने जोर-जोर से छलॉगे मारना शुरू कर दिया।लेकिन वह अंगूरों तक नहीं  पहुँच पाई ।काफी कोशिश करने के बाद भी वह अंगूरों तक नहीं पहुँँच पाई।यह सब कुछ पास ही पेड़ पर बैठे एक काले कुए ने देखा।।अंत में लोमडी ने मनोमन सोचा,'वैसे भी अँगूर खट्टे हैं"।ऐसा कहकर वह जंगल में लौट गई।लोमडी के जाते ही कौए ने अँगूर   पूरा स्वाद लेकर खाए और फिर जंगल की ओर उड़ गया।   शिक्षा: हमें अपनी कमजोरी का दोष दूसरों पर नहीं डालना चाहिए।     

moralstory in hindi for class 2 and class 3 ,"मोबाइल से असली दुनिया की ओर"

     गोपी नाम का एक लड़का था।वह एक छोटे शहर में अपने मम्मी और पापा के साथ रहता था।कुछ दिनों से वह पूरे दिन मोबाइल पर खेलता रहता था।उसके मम्मी पापा उसकी इस आदत से बहुत परेशान हो गए थे।मोबाइल के ज्यादा उपयोग से गोपी का शरीर बैठे बैठे स्थूल होने लगा था।वह अब पढ़ाई में भी कमजोर हो गया था।गोपी को अब चश्मा भी लग गया था।गोपी ने बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलना भी बंद कर दिया था।मम्मी के बार बार समझाने के बावजूद गोपी ने मोबाइल का इस्तेमाल कम नहीं किया था। मम्मी ने गोपी की मोबाइल की आदत सुधारने का एक उपाय सोचा।अपने प्लान में मम्मी ने पापा को भी शामिल कर लिया।      रविवार के दिन मम्मी ने सुबह जल्दी जागकर ढ़ेर सारा नाश्ता बना लिया।गोपी को जगाकर तैयार होने को कह दिया। गोपी के पूछने पर कहा कि आज वह सब पिकनिक पर जाएगें।मम्मी , पापा और गोपी नाश्ता लेकर गाड़ी में घूमने के लिये निकल पड़े।        पापा ने गाड़ी अनाथ आश्रम के बाहर आकर रोक दी।वह सब लोग आश्रम के अंदर गए और वहाँ ऑफिस में जाकर पापा ने ट्रस्टी से मुलाकात की।ट्रस्टी उन सब को मैदान में ले गए।गोपी ने मैदान...

every old story has a new part in hindi"चतुर खरगोश भाग 2"

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         जब से चतुर खरगोश ने अपनी बुधिमानी से शेर को कुए में गिरा कर मार दिया था तब से उसकी बुधिमानी की बात आसपास के सभी जंगल में फैल गई।जरुरत पड़ने पर आसपास के जंगल से सभी जानवर खरगोश से मदद के लिए आने लगे।खरगोश उन्हें हमेशा अच्छी सलाह देता या सही उपाय बताता था।   एक बार पड़ोस के नंदनवन जंगल से कुछ जानवर खरगोश से मिलने आये।नंदनवन में सभी जानवर भेड़िये के आतंक से बहुत परेशान थे।भेड़िया बिना मतलब आते जाते जानवरो को परेशान करता था।कई बार तो बिना जरूरत  वह अपने से कमज़ोर जानवरो को मार गिरता था।उसकी इस बात से सभी जानवर बहुत परेशान थे।      नंदनवन जंगल शहर के पास ही था। खरगोश ने कहा ,"चलो में भेड़िये से बात करने चलता हूँ"। खरगोश सभी जनवरों के साथ नंदनवन की ओर निकल पड़ा।रास्ते में खरगोश ने एक गड्ढा दिखा।जिसे देखकर खरगोश को उपाय सुझा और उसने सभी जानवरों से कहा इस गड्ढे को कॉटो से भर दो।सभी जानवरो ने ऐसा ही किया और बाद में खरगोश ने कॉटो को हरी घास से ढक दिया।फिर खरगोश ने भेड़िये के पास जाकर कहा,"महाराज आप तो नंदनवन के राजा हैं ।आप को पेड़ के ...

hindimoralstory for kids," चतुर खरगोश"

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 एक बार एक जंगल में एक बहुत ही घमंडी शेर रहता था।वह जंगल के सभी जानवरो को परेशान करता रहता था।सभी जानवर आपस में मिलकर इस परेशानी का हल  निकालकर शेर के पास पँहुच गए।      सभी ने कहा ,"महाराज अगर आपको कोई परेशानी ना हो तो आप को शिकार पर निकलने की कोई जरुरत नहीं है, हम रोज़ आपस में सलाह कर एक जानवर आपके खाने के लिए भेज देंगे"।    यह सुनकर शेर बहुत खुश हो गया और उसने सभी जानवरों की विनंती मान ली।अब हर रोज जंगल का एक जानवर शेर का भोजन बनकर जाने लगा।     एक दिन खरगोश की बारी आई।खरगोश थोड़ा कमज़ोर जरूर था, लेकिन वह चातुर बहुत था।उसने रास्ते में एक कुआ देखा।जब उस कुए में खरगोश झॉककर देखा तो उसे उसमें एक दम साफ पानी दिखा।यह देखकर खरगोश को एक उपाय सुझा।       शेर के पास पँहुच कर खरगोश ने कहा "देरी से आने के लिया माफी चाहता हूँ। जंगल के जानवरो ने तो मेरे साथ चार और खरगोश आपके भोजन के लिए भेजे थे।लेकिन उस नकली राजा ने उन चारों को खा लिया और मुझे आपके पास भेज दिया।उसने तो यह भी कहा के जंगल का असली राजा वह हैं आप तो नकली राजा हो"। ...