"तुम अपना वर्तमान और भविष्य  दोनों ही हो,"

      एक समय की बात है।एक बहुत ही आमिर आदमी एक बड़े शहर में रहता था। वह बहुत ही महनती था।उसके पास जीवन   की सभी सुख सुविधाए थी।लेकिन  वह अपने  लक्ष्य पर ठीक से काम नहीं कराता था।इसके चलते उसका काम बुरी तरह खराब होता था और  वह हमेशा दुःखी रहता था।उसने अपनी समस्या को हल करने  की बहुत कोशिश  की लेकिन उसे कोई हल नहीं मिला।
     अतः उसने अपनी  परेशानी एक बहुत  ही  बड़े  तपस्वी  संत बताई।उसकी समस्या  सुनने  के बाद संत ने उससे कहा कि तुम अपने भविष्य  की इतनी चिंता  करते हो कि तुम अपनी वर्तमान     की समस्या और खुशिओं को ही भूल जाते हो। मनुष्य जो हुआ ही नहीं है उसकी चिंता में अपना समय और शरीर दोनों  ही खराब कर देता है।
 आदमी को हमेशा याद रखना चाहिए कि ,"वह अपना वर्तमान और भविष्य दोनों ही है"।

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